ज्योतिष का नकारात्मक पहलू 👉🏻जीवन को नकारात्मक दिशा में मोड़ता ज्योतिष:-
1 ➡ज्योतिष का नकारात्मक पहलू
जीवन को नकारात्मक दिशा में मोड़ता ज्योतिष:-
*लड़की तो मंगली है, तो उपाय बताएं? गुण या नाड़ी नहीं मिल रहे हैं, तो उपाय बताएं? वर्तमान में ऐसे सवाल अक्सर पूछे जाते हैं। पहले ऐसा था कि लड़की या लड़के को मंगल है, तो उसके लिए मंगल ही ढूंढते थे। गुण नहीं मिल रहे हैं, तो दूसरा रिश्ता ढूंढते थे। लेकिन वर्तमान में उपाय बता दिए जाते हैं जिसके चलते कुछ रिश्ते हो जाते हैं। हालांकि आज भी कई ऐसे लड़के और लड़कियां हैं, जो अधिक उम्र के हो चले हैं और अभी तक मंगल और गुण ही मिला रहे हैं। समाज की ऐसी ही धारणाओं के कारण उपाय पूछे जाने से एक कदम आगे अब प्रेम विवाह का प्रचलन बढ़ गया है लेकिन इसमें जोखिम भी बढ़ गया है। अधिकतर प्रेम विवाह असफल हो चले हैं। हालांकि इसमें किसी कुंडली का दोष नहीं भी हो सकता है। लेकिन इन सब बातों से यह बात निकलकर सामने आती है कि ज्योतिष के कारण व्यक्ति कंफ्यूज जरूर हो गया है। उसके स्वाभाविक और वास्तविक जीवन पर जरूर प्रभाव पड़ा है।
*यदि कोई व्यक्ति ज्योतिष विद्या के माध्यम से लोगों को भयभीत कर रहा है, तो समाज अकर्मण्यता और बिखराव का शिकार होकर वेदोक्त ईश्वर के मार्ग से भटक जाएगा और कहना होगा कि भटक ही गया है। इस भटकाव के कई पहलू हैं जिसमें से एक पहलू यह है कि वह ईश्वर, भगवान या खुद से ज्यादा ज्योतिष पर विश्वास करता है। ग्रह-नक्षत्रों से डरकर उनकी भी पूजा या प्रार्थना करने लगता है। वह अपना हर कार्य लग्न, मुहुर्त या तिथि देखकर करता है और उस कार्य के होने या नहीं होने के प्रति संदेह से भरा रहता है। ऐसे में उसका वर्तमान, वास्तविक जीवन और अवसर हाथों से छूट जाता है। व्यक्ति जिंदगीभर अनिर्णय की स्थिति में रहता है। निर्णयहीन व्यक्ति में आत्मविश्वास नहीं होता है। डिसीजन पॉवर (निर्णय शक्ति) उसमें होता है, जो अपनी सोच से ज्ञान और जानकारी का उपयोग सही और गलत को समझने में करता है।
मनुष्य को डरपोक बनाता है ज्योतिष:-
*जीवन में कुछ भी हो रहा है, तो ऐसा माना जाता है कि सब ग्रह-नक्षत्रों का खेल है। उदाहरण भी दिया जाता है कि भगवान राम भी ग्रह-नक्षत्रों के फेर या खेल से बच नहीं पाए। राम को वनवास हुआ, तो ग्रहों के कारण ही। हालांकि कोई व्यक्ति यह नहीं सोचता है कि श्रीराम के वनवास के और भी कारण थे। यह बात आंख मूंदकर इसलिए मान ली जाती है, क्योंकि आपके पास वे आंकड़े नहीं हैं जिससे कि यह सिद्ध कर सकें कि इन्हीं ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में ही कुछ लोगों को वनवास नहीं, राजपाट मिला है। कोई यह नहीं सोचता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपना ही नहीं, अपने आसपास के सभी लोगों का जीवन भी संचालित किया था। कहना चाहिए कि उन्होंने ही संपूर्ण महाभारत कथा की रचना की थी। इसमें किसी ग्रह-नक्षत्र का कोई रोल नहीं था। वर्तमान का ज्योतिष ग्रह-नक्षत्रों से डराने वाला ज्योतिष है। जो लोग वेद, ईश्वर और कर्म पर भरोसा करते हैं, वे किसी से भी डरते नहीं है
*बहुत से लोगों के मन में आजकल ज्योतिष विद्या को लेकर संदेह और अविश्वास की भावना है जिसका कारण वर्तमान में प्रचलित ज्योतिष और इसको लेकर किए जा रहे व्यापार से है। टीवी चैनलों में ज्योतिष शास्त्री ज्योतिष के संबंध में न मालूम क्या-क्या बातें करके समाज में भय और भ्रम उत्पन्न कर रहे हैं। यही कारण है कि कई लोगों के मन में अब ज्योतिष को लेकर संदेह उत्पन्न होने लगा है, जो कि जायज भी है। वर्तमान में ज्योतिष विद्या विवादों के घेरे में है और इसका कारण वे ज्योतिषशास्त्री हैं, जो लोगों का मनगढ़ंत भविष्य बता रहे हैं या लोगों को ग्रह-नक्षत्र से डरा रहे हैं। डरपोक लोगों के बारे में क्या कहें, वे तो किसी भी चीज से डर जाएंगे।
सकारात्मक पहलू अगले कंटेंट में👉🏻🌍

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