ग्रहों का मानव जीवन में प्रभाव

 ग्रहों का मानव जीवन में प्रभाव :

         
हमारी धरती पर सूर्य का सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है, उसके बाद चन्द्रमा का प्रभाव माना गया है। उसी तरह क्रमश: मंगल, गुरु, बुद्ध और शनि का भी प्रभाव पड़ता है। ग्रहों का प्रभाव संपूर्ण धरती पर पड़ता है, किसी एक मानव पर नहीं। धरती के जिस भी क्षेत्र विशेष में जिस भी ग्रह विशेष का प्रभाव पड़ता है, उस क्षेत्र विशेष में परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
धरती के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव का प्रभाव संपूर्ण धरती पर रहता है और पृथ्वी एक सीमा तक सभी वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है। समुद्र में ज्वार-भाटा का आना भी सूर्य और चन्द्र की आकर्षण शक्ति का प्रभाव है। अमावस्या और पूर्णिमा का भी हमारी धरती पर प्रभाव पड़ता है। जब हम 'प्रभाव पड़ने' की बात करते हैं, तो इसका मतलब यह कि एक जड़ वस्तु चाहे वह चन्द्रमा हो, उसका प्रभाव दूसरी जड़ वस्तु चाहे वह समुद्र का जल हो या हमारे पेट का जल, पर पड़ता है। लेकिन हमारे मन और विचारों को हम नियंत्रण में रख सकते हैं। मन को नियंत्रण में रखने से भविष्य भी नियंत्रित हो जाता है।
जिस तरह चन्द्रमा के कारण धरती के समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है निश्चित ही वह चन्द्रमा हमारे शरीर में स्थित जल को भी प्रभावित करता है। जल के प्रभावित होने से व्यक्ति का मन प्रभावित होता है। इसी तरह प्रत्येक ग्रह या नक्षत्र का प्रभाव धरती पर पड़ता है, लेकिन उसका असर अलग-अलग क्षेत्र की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग होता है। ठीक उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति पर उन ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए जैसे यदि कहीं पर तूफान उठा है, तो उस तूफान के चलते कुछ लोग बीमार पड़ जाते हैं, कुछ वृक्ष उखड़ जाते हैं और कुछ मकान की छतें उड़ जाती हैं। लेकिन जो व्यक्ति मजबूत है, वह बीमार नहीं पड़ेगा, जो वृक्ष लचीला है, वह कभी उखड़ेगा नहीं और जिस मकान की छत मजबूत है, वह उड़ेगी नहीं। अत: जिस तरह तूफान का असर प्रत्येक व्यक्ति पर भिन्न-भिन्न होता है, उसी तरह ग्रह-नक्षत्रों का असर भी माना जाता है
एक अन्य उदाहरण कि जिस प्रकार एक ही भूमि में बोए गए आम, नीम, बबूल अपनी-अपनी प्रकृति के अनुसार गुण-धर्मों का चयन कर लेते हैं और सोने की खदान की ओर सोना, चांदी की ओर चांदी और लोहे की खदान की ओर लोहा आकर्षित होता है, ठीक उसी प्रकार पृथ्वी के जीवधारी विश्व चेतना के अथाह सागर में रहते हुए भी अपनी-अपनी प्रकृति के अनुरूप भले-बुरे प्रभावों से प्रभावित होते हैं।
कोई-सा भी ग्रह न तो खराब होता है और न अच्छा। ग्रहों का धरती पर प्रभाव पड़ता है लेकिन उस प्रभाव को कुछ लोग हजम कर जाते हैं और कुछ नहीं। प्रकृति की प्रत्येक वस्तु का प्रभाव अन्य सभी जड़ वस्तुओं पर पड़ता है। ज्योतिर्विज्ञान के अनुसार ग्रहों के पृथ्वी के वातावरण एवं प्राणियों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन-विश्लेषण भी किया जाता है।
 ग्रह, ग्रह हैं या देवता, हैं अगला कांटेक्ट👉🏻🌍

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