कालसर्प योग के लक्षण पूर्ण कालसर्प योग एवं आंशिक कालसर्प योग के असर, उपाय और निवारण

 kaal sarp yog  kaal sarp yog effects kaal sarp yog benefits
पूर्ण कालसर्प योग एवं आंशिक कालसर्प योग 

के असर, उपाय और निवारण


panditvedprakashji.blogspot.com

पूर्ण कालसर्प योग आंशिक कालसर्प योग: किसी जातक की कुंडली में काल सर्प योग का होना, जातक के जीवन में भीषण दुष्परिणाम लाता है | यह दोष कुंडली में ग्रहों की एक विशेष प्रकार स्थिति से उजागर होता है |

हिन्दू वैदिक आचार्य  के अनुसार यदि सभी सात ग्रह राहु केतु धुरी रेखा के एक ही और हों और कोई भी ग्रह दूसरी तरफ न हो तो जातक की कुंडली पर पूर्ण काल सर्प योग होता है | यदि एक भी ग्रह इस धुरी रेखा के बाहर हो अथवा दूसरी तरफ हो तो इसे आंशिक काल सर्प योग कहा जाता है |

आंशिक काल सर्प योग, पूर्ण काल सर्प योग जितना दुष्प्रभावी नहीं होता किन्तु इसके दुष्प्रभावों को नकारा नहीं जा सकता है

 प्रयागराज नाग वासुकी मंदिर में काल सर्प पूजा बुक करे👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻

 सम्पर्क 🌍www.PanditVedPrakashJi.Com


पूर्ण कालसर्प योग  एवं आंशिक कालसर्प योग के प्रभाव

यदि कोई व्यक्ति काल सर्प दोष के प्रभाव में है, तो उन्हें  बुरे सपने आएंगे। उनके लिए सो जाना कोई आसान काम नहीं होगा। उनका मन भय और नकारात्मक विचारों से भर जाएगा।

जिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, वे अनियमित नींद से पीड़ित होते हैं, अर्थात वे सोते समय कई बार जागते हैं। साथ ही, वे सांपों के सपने देखते हैं। वे लगातार महसूस करते हैं जैसे कोई उनके करीब खड़ा है

जिनकी कुंडली में  काल सर्प दोष के प्रभाव में हैं, उन्हें पारिवारिक विवादों को देखना और अनुभव करना पड़ सकता है। उनका सारा प्रयास और परिश्रम उनके अनुरूप सफल नहीं होता। उनके दुश्मनों की सूची बढ़ जाती है।

 आंशिक कालसर्प योग से होने वाले दोष पूर्ण काल सर्प योग की तरह ही हो सकते है

कैसे जाने आपकी कुंडली में है यह दोष ???????

यदि जातक की कुंडली में समस्त ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते है को यह पूर्ण काल सर्प दोष प्रदर्शित होता है

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हिंदू वैदिक आचार्यों के मतानुसार यदि सभी सात ग्रह राहु और केतु के अक्ष के एक ही तरफ हैं, और एक भी ग्रह दूसरी तरफ नहीं है, केवल तभी एक पूर्ण काल सर्प दशा बनती है। ऐसी परिस्थितियों में जहां एक भी ग्रह बाहर या दूसरी तरफ है, तो यह आंशिक काल सर्प दोष है।
                      👇🏻कालसर्प योग के उपाय👇🏻
 कालसर्प योग का निवारण करना जातक के लिए अति अनिवार्य है और इसके लिए कई उपाय बताये है यह जातक की ही कुंडली पर निर्भर करेगा की उसके लिए कौन सा उपाय ज्यादा फायदेमंद होता है
इसके अलावा जातक की जीवन शैली और उसके निवास स्थान के हिसाब से उसके लिए ज्योतिष भिन्न भिन्न उपाय सुझा सकते है इसलिए हम काल सर्प दोष से झूझ रहे जातकों को राय देंगे कि वो अपनी जीवन शैली , जीविका कमाने के आधार और अपने निवास की जानकारी पंडित जी को बताकर अपने लिए उचित सुझाव लें
1 भगवान शिव की पूजा अर्चना करें। दीपक जलाकर “ओम नमः शिवाय“ मंत्र का 21000 बार जप करें।
2 भगवान श्री कृष्ण का पूजन करें और प्रतिदिन “ओम नमो भगवते वासुदेवाय”  मंत्र का 108 बार जप करें। 
3 महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें।
4कालसर्प दोष निवारण मंत्र का जाप करें 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। नान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
5 नवनाग  स्त्रोत्र का पाठ करें।
6अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत इति श्री नवनागस्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll
7॥ नाग गायत्री मंत्र 
ll ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धी माहि तन्नो सर्प प्रचोदयात ll
8 ॐ नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च प्रथिवी मनु । ये अंतिरिक्षे ये दिवि तेभ्यो : सर्पेभ्यो नमः
9 पीपल के पेड़ को पानी देना
10 नियमित मंत्रोच्चारण करना
11 नाग पंचमी को व्रत धारण करना
12 काल सर्प दोष निवारण पूजा
ऐसा आवश्यक नहीं है कि जिस जातक की कुंडली में काल सर्प हो वो सब बदकिस्मत ही हों । इस दोष का प्रभाव प्रभाव ग्रहों के अनुसार भिन्न -भिन्न होता है और यह कुंडली में उपस्थित विभिन्न योगों की उपस्थिति पर निर्भर करता है।

इसलिए जातक को इस विषय में अपनी सीमित जानकारी के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए जातक को अपनी कुंडली किसी विद्वान पंडित से दिखाकर उस पर विस्तार से जानकारी ले सकता है
इस जानकारी का जानना बेहद आवश्यक है कि दोष का प्रकार क्या है व वह आपके जीवन में क्या प्रभाव लाएगा।
आप पंडित वेद प्रकाश जी से पता लगाएँ कि क्या आपकी कुंडली में यह दोष है और यदि है तो इसकी मौजूदगी आपके जीवन को किस प्रकार से प्रभावित कर सकती है।

आंशिक काल सर्प दोष का प्रमुख उपाय महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित त्रयंबकेश्वर में काल सर्प दोष की पूजा करना है  यदि वहां  जाना संभव ना हो प्रयागराज स्थित नाग वासुकी मंदिर में भी इसकी मान्यता है | इस पूजा के अंतर्गत  पृथ्वी ,गौरी गणेश, कलश ,16 मातृका, सप्त घृत, 64 योगिनी, वास्तु पुरुष, क्षेत्रपाल ,नवग्रह ,रूद्र कलश ,राहु ,काल, मनसा देवी ,नवनाग मंडल, इत्यादि देवताओं की पूजा राहु ,केतु,  सर्प , का जाप उसके पश्चात रुद्राभिषेक, नवनाग सहस्रार्चन, हवन ,छाया दान, नाग विसर्जन, इत्यादि कार्य होते हैं तब संपूर्ण कालसर्प दोष की शांति होती है

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

धृतराष्ट्र का कौनसा पुत्र पांडवों की ओर से लड़ा था?

क्‍या है गंडमूल नक्षत्र?