21.6.2020 को दोपहर 02.04बजे तक सूतक का पालन करें 👉सूतककाल में मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है

सूर्यग्रहण । यह ग्रहण 21.6.2020 के सवेरे 10.31 से लेकर दोपहर 02.04 बजे तक है हृषिकेश पंचांग के अनुसार । अन्य अन्य  पंचांग  में   10.01 से 01.28 मिनट तक ग्रहणस्पर्श से ग्रहणमोक्ष तक का काल पुण्यकाल होता है । शास्त्रों में बताया गया है कि इस समय ईश्‍वर के आंतरिक सान्निध्य में रहने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है सूर्यग्रहण से पूर्व सूर्य चंद्र की छाया में आने लगता है । उससे धीरे-धीरे उसका प्रकाश क्षीण होना आरंभ होता है । इसी को ग्रहण का सूतक लगना कहते हैं ।
 21.6.2020 को दोपहर 02.04बजे तक सूतक का पालन करें 

सूर्यग्रहण की अवधि में पालन करने हेतु नियम------
सूतककाल में स्नान, देवतापूजन, नित्यकर्म, जपजाप्य एवं श्राद्धकर्म किए जा सकेंगे सूतककाल में भोजन करना निषिद्ध है; इसलिए अन्नपदार्थ न खाएं; परंतु आवश्यक पानी पीना, मल-मूत्रोत्सर्ग एवं विश्राम करना जैसे कर्म किए जा सकते हैं ।  

स्वास्थ्य की दृष्टि से सूतकनियम पालन का महत्त्व ----------

सूतककाल में जीवाणुओं के बढने से अन्न शीघ्र दूषित होता है । जिस प्रकार रात का अन्न दूसरे दिन बासी हो जाता है, उस प्रकार ग्रहण के पूर्व का अन्न ग्रहण के पश्‍चात बासी हो जाता है । केवल दूध और पानी के लिए यह नियम लागू नहीं है  ग्रहण से पूर्व के दूध और पानी का उपयोग ग्रहण समाप्त होने के उपरांत भी किया जा सकता है ।
मानसिक स्तर------
सूतककाल में मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है । इससे कुछ व्यक्तियों में निराशा आना, तनाव बढना आदि मानसिक कष्ट होते हैं  ऐसा मनोविकार विशेषज्ञ बताते हैं ।
ग्रहणकाल में की गई साधना का फल सहस्रों गुना मिलता है । इसलिए ग्रहणकाल में साधना को प्रधानता देना महत्त्वपूर्ण है । सूतकारंभ से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक नामजप, स्तोत्रपरायन, ध्यानधारणा आदि धार्मिक कार्यों में मन को संलिप्त रखने से उसका लाभ मिलता है 

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